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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 19

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान् | क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उन द्वेष करनेवाले, क्रूर स्वभाववाले और संसारमें महान् नीच, अपवित्र मनुष्योंको मैं बार-बार आसुरी योनियोंमें गिराता ही रहता हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

उन द्वेष करनेवाले, क्रूर स्वभाववाले और संसारमें महान् नीच, अपवित्र मनुष्योंको मैं बार-बार आसुरी योनियोंमें गिराता ही रहता हूँ।

English Meaning

Those cruel haters, worst among men in the world, I hurl those evil-doers into the wombs of demons only.

Those cruel haters, worst among men in the world, I hurl those evil-doers into the wombs of demons only.

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