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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 22

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः | आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे कुन्तीनन्दन ! इन नरकके तीनों दरवाजोंसे रहित हुआ जो मनुष्य अपने कल्याणका आचरण करता है, वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे कुन्तीनन्दन ! इन नरकके तीनों दरवाजोंसे रहित हुआ जो मनुष्य अपने कल्याणका आचरण करता है, वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है।

English Meaning

A man who is liberated from these three gates to darkness, O Arjuna, practises what is good for him and thus goes to the Supreme Goal.

A man who is liberated from these three gates to darkness, O Arjuna, practises what is good for him and thus goes to the Supreme Goal.

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