वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
को बड़ छोट कहत अपराधू । सुनि गुन भेदु समुझिहहिं साधू ॥ देखिअहिं रूप नाम आधीना । रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना ॥
Ko bad chhot kahat aparadhu. Suni gun bhedu samujhihahin saadhu. Dekhiahi roop naam aadhina. Roop gyaan nahin naam bihina.
इन (नाम और रूप) में कौन बड़ा है, कौन छोटा, यह कहना तो अपराध है। इनके गुणोंका तारतम्य (कमी-बेशी) सुनकर साधु पुरुष स्वयं ही समझ लेंगे। रूप नामके अधीन देखे जाते हैं, नामके बिना रूपका ज्ञान नहीं हो सकता ॥ २ ॥
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