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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 3

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

लखि सुबेष जग बंचक जेऊ । बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ ॥ उघरहिं अंत न होइ निबाहू । कालनेमि जिमि रावन राहू ॥

Lakhi subesha jaga banchaka jeu. Besha pratapa pujiahin teu. Ugharahin anta na hoi nibahu. Kalanemi jimi ravana rahu.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो [वेषधारी] ठग हैं, उन्हें भी अच्छा (साधुका-सा) वेष बनाये देखकर वेषके प्रतापसे जगत् पूजता है; परन्तु एक-न-एक दिन वे चौड़े आ ही जाते हैं, अन्ततक उनका कपट नहीं निभता, जैसे कालनेमि, रावण और राहुका हाल हुआ॥ ३॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 3 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik