वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
धूम कुसंगति कारिख होई । लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई ॥ सोइ जल अनल अनिल संघाता । होइ जलद जग जीवन दाता ॥
Dhuma kusangati karikha hoi. Likhia purana manju masi soi. Soi jala anala anila sanghata. Hoi jalada jaga jivana data.
कुसंगके कारण धुआँ कालिख कहलाता है, वही धुआँ [सुसंगसे] सुन्दर स्याही होकर पुराण लिखनेके काममें आता है और वही धुआँ जल, अग्नि और पवनके संगसे बादल होकर जगत्को जीवन देनेवाला बन जाता है॥ ६॥
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