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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 100

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कहयो । का देऊँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रहयो ॥ सिवें कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भाँतिहिं कियो । पुनि गहे पद पाथोज मयना प्रेम परिपूरन हियो ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बहुत प्रकारका दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचलने कहा- हे शंभु! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? [इतना कहकर] वे शिवजीके चरणकमल पकड़कर रह गये। तब कृपाके सागर शिवजीने अपने ससुरका सभी प्रकारसे समाधान किया। फिर प्रेमसे परिपूर्णहृदय मैनाने शिवजीके चरणकमल पकड़े [और कहा-] ।

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श्रीरामचरितमानस छंद 100 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik