वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानी । कोउ सुनि संसय करे जनि सुर अनादि जियँ जानी ॥ १०० ॥
मुनियोंकी आज्ञासे शिवजी और पार्वतीजीने गणेशजीका पूजन किया। मनमें देवताओंको अनादि समझकर कोई इस बातको सुनकर शंका न करे [कि गणेशजी तो शिव-पार्वतीकी संतान हैं, अभी विवाहसे पूर्व ही वे कहाँसे आ गये] ॥ १०० ॥
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