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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 100

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानी । कोउ सुनि संसय करे जनि सुर अनादि जियँ जानी ॥ १०० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मुनियोंकी आज्ञासे शिवजी और पार्वतीजीने गणेशजीका पूजन किया। मनमें देवताओंको अनादि समझकर कोई इस बातको सुनकर शंका न करे [कि गणेशजी तो शिव-पार्वतीकी संतान हैं, अभी विवाहसे पूर्व ही वे कहाँसे आ गये] ॥ १०० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 100 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik