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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

छंद 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

छं०— मंगल करनि कलिमलहरनि तुलसी कथा रघुनाथ की । गति क्रूर कबिता सरित की ज्यों सरित पावन पाथ की ॥ प्रभु सुजस संगति भनिति भलि होइहि सुजन मन भावनी । भव अंग भूति मसान की सुमिरत सुहावनि पावनी ॥

Chha. - Mangala karani kalimalaharani tulasi katha raghunatha ki. Gati krura kabita sarita ki jyon sarita pavana patha ki. Prabhu sujasa sangati bhaniti bhali hoihi sujana mana bhavani. Bhava anga bhuti masana ki sumirata suhavani pavani.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरघुनाथजीकी कथा कल्याण करनेवाली और कलियुगके पापोंको हरनेवाली है। मेरी इस भद्दी कवितारूपी नदीकी चाल पवित्र जलवाली नदी (गङ्गाजी) की चालकी भाँति टेढ़ी है। प्रभु श्रीरघुनाथजीके सुन्दर यशके संगसे यह कविता सुन्दर तथा सज्जनोंके मनको भानेवाली हो जायगी। श्मशानकी अपवित्र राख भी श्रीमहादेवजीके अंगके संगसे सुहावनी लगती है और स्मरण करते ही पवित्र करनेवाली होती है।

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श्रीरामचरितमानस छंद 1 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik