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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 84

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

भए कामबस जोगीस तापस पामरन्हि की को कहै । देखहिं चराचर नारिमय जे ब्रह्ममय देखत रहे ॥ अबला बिलोकहिं पुरुषमय जगु पुरुष सब अबलामयँ । दुउ दंड भरि ब्रह्मांड भीतर कामकृत कौतुक अयं ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जब योगीश्वर और तपस्वी भी कामके वश हो गये, तब पामर मनुष्योंकी कौन कहे? जो समस्त चराचर जगतको ब्रह्ममय देखते थे, वे अब उसे स्त्रीमय देखने लगे। स्त्रियाँ सारे संसारको पुरुषमय देखने लगीं और पुरुष उसे स्त्रीमय देखने लगे। दो घड़ीतक सारे ब्रह्मांडके अंदर कामदेवका रचा हुआ यह कौतुक (तमाशा) रहा।

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श्रीरामचरितमानस छंद 84 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik