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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 84

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम । ते निज निज मरजाद तजि भए सकल बस काम ॥ ८४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जगतमें स्त्री-पुरुष संज्ञावाले जितने चर-अचर प्राणी थे, वे सब अपनी-अपनी मर्यादा छोड़कर कामके वश हो गये ॥ ८४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 84 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik