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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 92

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तन खीन कोउ अति पीन पावन कोउ अपावन गति धरें । भूषन कराल कपाल कर सब सद्य सोनित तन भरें ॥ खर स्वान सुअर सृकाल मुख गन बेष अगनित को गनै । बहु जिनस प्रेत पिसाच जोगि जमात बरनत नहिं बनै ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कोई बहुत दुबला, कोई बहुत मोटा, कोई पवित्र और कोई अपवित्र वेष धारण किये हुए है। भयंकर गहने पहने हाथमें कपाल लिये हैं और सब-के-सब शरीरमें ताजा खून लपेटे हुए हैं। गधे, कुत्ते, सुअर और सियारके-से उनके मुख हैं। गणोंके अनगिनत वेषोंको कौन गिने? बहुत प्रकारके प्रेत, पिशाच और योगिनियोंकी जमातें हैं। उनका वर्णन करते नहीं बनता।

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श्रीरामचरितमानस छंद 92 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik