वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बिष्णु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज । बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज ॥ ९२ ॥
तब विष्णुभगवानने सब दिक्पालोंको बुलाकर हँसकर ऐसा कहा, सब लोग अपने-अपने दलसमेत अलग-अलग होकर चलो ॥ ९२ ॥
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