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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 94

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन जटिल भयंकरा । संग भूत प्रेत पिसाच जोगिनि बिकट मुख रजनीचरा ॥ जो जिअत रहिहि बरात देखत पुन्य बड़ तेहि कर सही । देखिहि सो उमा बिबाहु घर घर बात असि लरिकन्ह कही ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दूल्हेके शरीरपर राख लगी है, साँप और कपालके गहने हैं; वह नंगा, जटाधारी और भयंकर है। उसके साथ भयानक मुखवाले भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और राक्षस हैं। जो बरातको देखकर जीता बचेगा, सचमुच उसके बड़े ही पुण्य हैं और वही पार्वतीका विवाह देखेगा। लड़कोंने घर-घर यही बात कही।

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श्रीरामचरितमानस छंद 94 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik