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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 94

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जगदंबा जहाँ अवतरीं सो पुर बरनि कि जाइ । रिद्धि सिद्धि संपत्ति सुख नित नूतन अधिकाइ ॥ ९४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस नगरीमें स्वयं जगदंबाने अवतार लिया, क्या उसका वर्णन हो सकता है? वहाँ ऋद्धि, सिद्धि, संपत्ति और सुख नित-नये बढ़ते जाते हैं ॥ ९४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 94 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik