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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 95

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कस कीन्ह बर बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई । जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहि लागई ॥ तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं । घर जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस विधाताने तुमको सुंदरता दी, उसने तुम्हारे लिये वर बावला कैसे बनाया? जो फल कल्पवृक्षमें लगना चाहिये, वह जबर्दस्ती बबूलमें लग रहा है। मैं तुम्हें लेकर पहाड़से गिर पड़ूँगी, आगमें जल जाऊँगी या समुद्रमें कूद पड़ूँगी। चाहे घर उजड़ जाय और संसारभरमें अपकीर्ति फैल जाय, पर जीते-जी मैं इस बावले वरसे तुम्हारा विवाह न करूँगी।

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श्रीरामचरितमानस छंद 95 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik