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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 96

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जनि लेहु मातु कलंकु करना परिहरहु अवसर नाहीं । दुखु सुखु जो लिखा लिलार हमारे जाइ जहाँ पाउब तहीं ॥ सुनि उमा बचन बिनीत कोमल सकल अबला सोचहीं । बहु भाँति बिधिहि लगाइ दूषण नयन बारि बिमोचहीं ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे माता! कलंक मत लो, रोना छोड़ो, यह अवसर विषाद करनेका नहीं है। मेरे भाग्यमें जो दुःख-सुख लिखा है, उसे मैं जहाँ जाऊँगी, वहीं पाऊँगी। पार्वतीजीके ऐसे विनयभरे कोमल वचन सुनकर सारी स्त्रियाँ सोच करने लगीं और भाँति-भाँतिसे विधाताको दोष देकर आँखोंसे आँसू बहाने लगीं।

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श्रीरामचरितमानस छंद 96 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik