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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 97

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सिय बेषु सतीं जो कीन्ह तेहिं अपराध संकर परिहरहीं । हर बिरहँ जाइ बहोरि पितु कें जग्य जोगानल जरीं ॥ अब जनमि तुम्हरे भवन निज पति लागि दारुन तपु किया । अस जानि संसय तजहु गिरिजा सर्वदा संकरप्रिया ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सतीजीने जो सीताका वेष धारण किया, उसी अपराधके कारण शंकरुजीने उनको त्याग दिया। फिर शिवजीके वियोगमें ये अपने पिताके यज्ञमें जाकर वहीं योगाग्निसे भस्म हो गयीं। अब इन्होंने तुम्हारे घर जन्म लेकर अपने पतिके लिये कठिन तप किया है। ऐसा जानकर संदेह छोड़ दो, पार्वतीजी तो सदा ही शिवजीकी प्रिया (अर्धांगिनी) हैं।

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श्रीरामचरितमानस छंद 97 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik