वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
तेहि अवसर नारद सहित अरु ऋषि सस समेत । समाचार सुनि तुहिनगिरि गवने तुरत निकेत ॥ ९७ ॥
इस समाचारको सुनते ही हिमाचल उसी समय नारदजी और सप्तऋषियोंको साथ लेकर अपने घर गये ॥ ९७ ॥
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