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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 101

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेंहु । छमहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बर देहु ॥ १०१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणोंके समान [प्यारी] है। आप इसे अपने घरकी टहलनी बनाइयेगा और इसके सब अपराधोंको क्षमा करते रहियेगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिये ॥ १०१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 101 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik