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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 102

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति हेतु । बिबिध भाँति परितोष करि बिदा कीन्ह बृषकेतु ॥ १०२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब हिमवान् अत्यन्त प्रेमसे शिवजीको पहुँचानेके लिये साथ चले। वृषकेतु (शिवजी) ने बहुत तरहसे उन्हें सन्तोष कराकर बिदा किया ॥ १०२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 102 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik