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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

दोहा 31

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

रामकथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु । तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तुलसीदासजी कहते हैं कि रामकथा मंदाकिनी नदी है, सुन्दर (निर्मल) चित्त चित्रकूट है, और सुन्दर स्नेह ही वन है, जिसमें श्रीसीतारामजी विहार करते हैं ॥ ३१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 31 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik