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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 322

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सोहति बनिता बृंद महुँ सहज सुहावनि सीय । छबि ललना गन मध्य जनु सुषमा तिय कमनीय ॥ ३२२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सहज ही सुंदरी सीताजी स्त्रियोंके समूहमें इस प्रकार शोभा पा रही हैं, मानो छबिरूपी ललनाओंके समूहके बीच साक्षात् परम मनोहर शोभारूपी स्त्री सुशोभित हो ॥ ३२२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 322 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik