वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
मुदित अवधपति सकल सुत बधुन्ह समेत निहारि । जनु पाए महिपाल मनि क्रियन्ह सहित फल चारि ॥ ३२५ ॥
सब पुत्रोंको बहुओंसहित देखकर अवधनरेश दशरथजी ऐसे आनंदित हैं, मानो राजाओंके शिरोमणि क्रियाओंसहित चारों फल पा गये हों ॥ ३२५ ॥
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