वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि । बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि ॥ ७ (ग) ॥
Jada chetana jaga jiva jata sakala ramamaya jani. Bandaun saba ke pada kamala sada jori juga pani. 7 (ga)
जगत्में जितने जड़ और चेतन जीव हैं, सबको राममय जानकर मैं उन सबके चरणकमलोंकी सदा दोनों हाथ जोड़कर वन्दना करता हूँ॥ ७ (ग)॥
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