वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब । बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब ॥ ७ ( घ ) ॥
Deva danuja nara naga khaga preta pitara gandharba. Bandaun kinnara rajanichara kripa karahu aba sarba. 7 (gha)
देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, पक्षी, प्रेत, पितर, गन्धर्व, किन्नर और निशाचर सबको मैं प्रणाम करता हूँ। अब सब मुझपर कृपा कीजिये॥ ७ (घ)॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस