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17 सितंबर 2026

17 सितंबर 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

17 सितंबर 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल षष्ठी
नक्षत्र
अनुराधा
योग
विष्कम्भ
करण
तैतिल
वार
गुरुवार
हिन्दू मास
भाद्रपद
ऋतु
वर्षा
सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
18:24

आज के पर्व

Vishwakarma Pujaकन्या

17 सितंबर 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

मंत्र जप में संक्रांति का क्या विशेष महत्व है?

सूर्य राशि परिवर्तन = ऊर्जा transition → जप अधिक ग्रहण। पुण्यकाल (कई गुना)। गायत्री/सूर्य विशेष। मकर सर्वप्रमुख। ±3 घंटे पुण्यकाल। स्नान→दान→जप।

गुरु ग्रह मजबूत करने के गुरुवार उपाय?

विष्णु-लक्ष्मी पूजा, केला वृक्ष पूजा, 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 108, हल्दी/चना/पीला/पुस्तक दान, गुरुवार व्रत, पुखराज(ज्योतिषी), पीले वस्त्र। ज्ञान बांटें+दान=गुरु प्रसन्न।

हल्दी तिलक कब लगाना शुभ है

हल्दी तिलक गुरुवार को, मांगलिक कार्यों के आरंभ में, गणेश-लक्ष्मी पूजन में और विवाह-संस्कार में विशेष रूप से शुभ है। यह बृहस्पति ग्रह को बल देता है और मंगलाचरण का प्रतीक है।

गुरुवार को कौन से काम शुभ?

गुरुवार=बृहस्पति(ज्ञान/धन)। सबसे शुभ — विवाह, गृहप्रवेश, शिक्षा, पूजा, सोना खरीद, दान। सत्यनारायण कथा। कोई वर्जना नहीं।

गुरुवार को केले का दान क्यों करते हैं?

गुरुवार = बृहस्पति (गुरु) दिन। केला = पीला (गुरु का रंग) + विष्णु/बृहस्पति प्रतीक। विधि: पीले केले + 'ॐ बृहस्पतये नमः' + दान। लाभ: ज्ञान, सम्मान, संतान सुख, विवाह बाधा दूर।

हरतालिका तीज व्रत क्या है?

हरतालिका तीज = भाद्रपद शुक्ल तृतीया, निर्जला व्रत। कथा: हिमालय ने विष्णु से विवाह तय किया → पार्वती दुखी → सखी ने हरण कर जंगल ले गई → पार्वती ने बालू का शिवलिंग बनाकर रात भर जागरण किया → शिव प्रकट हुए और पत्नी स्वीकार किया।

गृहस्थों के लिए असितांग भैरव साधना कब करें?

गृहस्थों के लिए असितांग भैरव साधना दिन में — गुरुवार को सूर्योदय के बाद करनी चाहिए।

असितांग भैरव साधना किस दिन शुरू करनी चाहिए?

असितांग भैरव साधना गुरुवार (ज्ञान/त्वरित लाभ), कालाष्टमी या षष्ठी/बुधवार से शुरू की जा सकती है।

शिव वास भोजन में होने पर क्या होता है?

शिव वास भोजन में होने पर (षष्ठी, त्रयोदशी) शिव का ध्यान अन्यत्र होता है जिससे सकाम कर्म का फल प्राप्ति कठिन होती है — इन तिथियों को त्याज्य माना गया है।

द्विस्वभाव राशियां (Dual Signs) क्या होती हैं?

मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियों को द्विस्वभाव राशियां कहते हैं। इनका स्वभाव समय और परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेने वाला (लचीला) होता है।

कन्या राशि शुभ यंत्र

कन्या=बुध। बुध यंत्र/गणेश यंत्र। बुधवार स्थापना, 'ॐ बुं बुधाय नमः'। पन्ना। विद्या/व्यापार।

गुरुवार को बाल धोना चाहिए या नहीं

लोक मान्यता: गुरुवार बाल धोना अशुभ (बृहस्पति कमजोर)। शास्त्रीय आधार नहीं — पूर्णतः लोक/ज्योतिष। स्वच्छता > परंपरा। आस्था अनुसार; आवश्यकता हो तो धो सकते हैं।

गुरुवार को पीला पहनने से क्या होता है

गुरुवार-पीला = बृहस्पति कृपा — ज्ञान, शिक्षा, धन, विवाह सुख, सम्मान। विष्णु पूजा, केला दान। बृहस्पति = गुरु/ज्ञान/धर्म। ज्योतिष परंपरा।

हरतालिका तीज व्रत में बालू से शिव पार्वती बनाने का क्या विधान है?

बालू शिव-पार्वती: पार्वती ने बालू शिवलिंग बनाकर तप किया (अनुसरण)। विधि: बालू/मिट्टी→शिवलिंग+पार्वती+गणेश→केले पत्ते→षोडशोपचार→बेलपत्र। 'हरतालिका'=सखी ने हरा (छिपाया)। निर्जला+जागरण। प्रातः विसर्जन।

गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना कैसे करें?

गणपति स्थापना: मिट्टी मूर्ति → चौकी सज्जा → प्राण प्रतिष्ठा (पंचामृत स्नान, 'ॐ गं गणपतये नमः') → षोडशोपचार → गणेश अथर्वशीर्ष → 21 मोदक भोग → आरती → प्रतिदिन पूजा → अनंत चतुर्दशी विसर्जन। दूर्वा 21 गाँठ। चन्द्र दर्शन वर्जित।

गुरु ग्रह शांति पूजा कैसे करें?

गुरु शांति: गुरुवार → 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 19000 जप → पीपल समिधा + पीले तिल-चना हवन → विष्णु सहस्रनाम → दान (पीला वस्त्र, चना, हल्दी, केसर, पुखराज) → गुरुवार व्रत → पीपल पूजा।

गुरुवार को पीला कपड़ा पहनने से क्या लाभ होता है?

गुरुवार बृहस्पति ग्रह का दिन है, पीला रंग बृहस्पति का कारक है। पीला पहनने से भाग्य वृद्धि, ज्ञान, शिक्षा में सफलता, विवाह बाधा निवारण और धन-समृद्धि होती है।

महालक्ष्मी व्रत सोलह दिन कैसे रखें?

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से 16 दिन। प्रतिदिन लक्ष्मी पूजा + कथा। 16 सूत डोरा। एक समय भोजन। उद्यापन: ब्राह्मण/सुहागिन भोजन+दान। 16 = पुष्प/सुपारी/श्रृंगार।

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पर्व-पञ्चांग

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17 सितंबर 2026 — आज का पंचांग और प्रश्नोत्तर — 18