शिव पूजा नियमशिवलिंग का आकार कितना होना चाहिए घर की पूजा के लिए?घर: अंगुष्ठ प्रमाण (शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता) — 2-4 इंच आदर्श, अधिकतम 6 इंच। बड़ा शिवलिंग = अत्यधिक ऊर्जा, घर में अनुपयुक्त। मंदिर: कोई सीमा नहीं। ऊंचाई:चौड़ाई = 2:1 अनुपात उत्तम।#आकार#ऊंचाई#अंगुष्ठ
दिव्यास्त्रवासवी शक्ति किस रूप में थी — तलवार, बाण या भाला?वासवी शक्ति भाले या बर्छी के रूप में थी। एक बार छोड़े जाने के बाद यह लक्ष्य को भेदकर ही वापस इंद्र के पास लौटती थी।#वासवी शक्ति#भाला#बर्छी
लोकसुधर्मा सभा कैसी दिखती है?सुधर्मा सभा 150 योजन लंबी, 100 योजन चौड़ी और 5 योजन ऊँची है। यह सूर्य के समान प्रकाशित है और इच्छानुसार आकाश में विचरण करती है।#सुधर्मा#आकार#150 योजन
लोकसुमेरु पर्वत की ऊँचाई और आकार कैसा है?सुमेरु पर्वत 84,000 योजन ऊँचा और 16,000 योजन गहरा है। शिखर का व्यास 32,000 योजन है जबकि आधार केवल 16,000 योजन — यह उल्टे शंकु जैसा है।#सुमेरु पर्वत#ऊँचाई#आकार
लोकभूमण्डल की संरचना कमल-पत्र के समान क्यों बताई गई है?जम्बूद्वीप उत्तर-दक्षिण में दबा और मध्य में उभरा होने से कमल-पत्र जैसा दिखता है। सुमेरु पर्वत कमल की कर्णिका और नव-वर्ष उसकी पंखुड़ियाँ हैं।#भूमण्डल#कमल पत्र#आकार
लोकभूलोक किस आकार का है?भूलोक का आकार एक विशाल खिले हुए कमल-पत्र के समान है। इसका विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) बताया गया है।#भूलोक#आकार#कमल पत्र
वास्तु शास्त्रवास्तु में गोल आकार का कमरा शुभ है या अशुभगोल आकार का कमरा आवासीय प्रयोजन के लिए अशुभ है। ऊर्जा असंतुलन और मानसिक अस्थिरता होती है। वर्गाकार और आयताकार आकार सर्वोत्तम हैं। सार्वजनिक भवनों में गोल आकार स्वीकार्य।#वास्तु#गोल कमरा#आकार
दिव्यास्त्रसुदर्शन चक्र कैसा दिखता है?सुदर्शन चक्र एक गोलाकार दांतेदार अस्त्र है जिसमें तीक्ष्ण आरे विपरीत दिशाओं में घूमते हैं। इसका व्यास 12-30 सेमी और वजन लगभग 2200 किलोग्राम बताया गया है।#सुदर्शन चक्र#आकार#संरचना
दिव्यास्त्रवज्र कैसा दिखता है?वज्र को दो सिरों वाली गदा या राजदंड के रूप में चित्रित किया जाता है। यह महर्षि दधीचि की रीढ़ की हड्डी से बना एक अनूठा दिव्य अस्त्र है।#वज्र#स्वरूप#आकार
हवन/यज्ञहवन कुंड का आकार और दिशा क्या होनी चाहिए?वर्गाकार (सामान्य), त्रिकोण (शक्ति), वृत्त (शांति)। घर=1×1 फीट। गहराई=चौड़ाई/3। पूर्व मुख (यजमान=पश्चिम)। तांबा=सर्वोत्तम। वेदी=चारों ओर।#हवन कुंड#आकार#दिशा
मरणोपरांत आत्मा यात्रापिण्डज शरीर कितने आकार का बनता है?पिण्डज शरीर लगभग एक हाथ के आकार का बनता है।#पिण्डज शरीर#आकार#एक हाथ
लोकवायु पुराण में ऋषियों के अलग-अलग मतों का क्या तात्विक अर्थ है?वायु पुराण के ऋषियों के अलग-अलग मत यह दर्शाते हैं कि सत्यलोक अनिर्वचनीय और अतीन्द्रिय है। हर ऋषि ने एक आयाम देखा — पूर्ण स्वरूप केवल ब्रह्मा जानते हैं।#वायु पुराण#ऋषि मत#तात्विक
लोकवायु पुराण में ऋषियों ने सत्यलोक का आकार कैसा बताया?वायु पुराण में ऋषियों के अलग-अलग मत हैं — अत्रि (100 कोण), भृगु (1000 कोण), सावर्णि (अष्टकोण), वार्ष्यायणि (निराकार), गार्ग्य (वेणी जैसा)। निष्कर्ष — केवल ब्रह्मा ही जानते हैं।#वायु पुराण#आकार#ऋषि मत
जीवन एवं मृत्युसूक्ष्म शरीर का आकार कितना बताया गया है?गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में बताया गया है कि मृत्यु के समय शरीर से अंगूठे के बराबर (अंगुष्ठ मात्र) जीवात्मा निकलती है। यह प्रतीकात्मक वर्णन उस सूक्ष्म चेतना का संकेत है जो शरीर त्यागती है।#सूक्ष्म शरीर#आकार#अंगुष्ठ मात्र
तंत्र शास्त्रतंत्र में होम कुंड का आकार और दिशा क्या होनी चाहिए?आकार: वृत्त=शांति, चौकोर=सर्वकार्य (सामान्य गृहस्थ), त्रिकोण=मारण (वर्जित), अर्धचंद्र=वशीकरण, पद्म=मोक्ष। दिशा: कुंड मुख पूर्व, साधक पश्चिम (पूर्वमुखी)। गृह: 1×1 फुट। विशेष = विद्वान से।#होम कुंड#हवन#आकार