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जीवात्मा से जुड़े सभी प्रश्न(12)

जीवात्मा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 12 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

भूलोक को 'महा-रंगमंच' क्यों कहा गया है?

भूलोक 'महा-रंगमंच' इसलिए है क्योंकि यहाँ अनगिनत जीवात्माएं अपने कर्मों का नाटक खेलती हैं। देवता भी यहाँ जन्म चाहते हैं क्योंकि केवल यहीं मोक्ष का मार्ग है।

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लोक

जीवात्माएँ कब जागृत हुईं?

सृष्टि गति शुरू होने के बाद।

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जीवन एवं मृत्यु

मृत्यु के समय शरीर क्यों निष्क्रिय हो जाता है?

शरीर की चेतना और शक्ति का आधार जीवात्मा है। मृत्यु के समय जीवात्मा शरीर छोड़ती है — इसी प्रक्रिया में प्राण-ऊर्जा हटती जाती है और शरीर निष्क्रिय होता जाता है। जीवात्मा के बिना यह शरीर पाँच तत्वों का जड़ आवरण मात्र रह जाता है।

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जीवन एवं मृत्यु

क्या जीवात्मा पुनर्जन्म लेती है?

हाँ, जीवात्मा पुनर्जन्म लेती है। भगवद्गीता, गरुड़ पुराण और कठोपनिषद सभी इसकी पुष्टि करते हैं। कर्मों और अंतिम विचारों के आधार पर अगला जन्म निर्धारित होता है। मोक्ष प्राप्ति पर यह चक्र समाप्त होता है।

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जीवन एवं मृत्यु

मृत्यु के बाद जीवात्मा कहाँ जाती है?

मृत्यु के बाद जीवात्मा यमलोक जाती है जहाँ उसके कर्मों का न्याय होता है। पुण्यात्मा स्वर्ग, पापात्मा नरक और मोक्ष के योग्य सीधे परमधाम जाती है। 13 दिन तक आत्मा परिजनों के पास रहती है।

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जीवन एवं मृत्यु

क्या मृत्यु के समय जीवात्मा दिखाई देती है?

जीवात्मा स्वभावतः सूक्ष्म और अदृश्य है, साधारण नेत्रों से दिखाई नहीं देती। गरुड़ पुराण में बताए गए शारीरिक परिवर्तन — जैसे आँखें उलटना या शरीर शिथिल होना — उसके निर्गमन के बाह्य संकेत हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

जीवात्मा शरीर छोड़ने के बाद क्या धारण करती है?

जीवात्मा स्थूल शरीर छोड़ने के बाद सूक्ष्म शरीर धारण करती है। यह सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि, अहंकार और इंद्रियों के सूक्ष्म तत्वों से बना होता है और अगले जन्म तक आत्मा के साथ रहता है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

पुनर्जन्म का सिद्धांत क्या है?

पुनर्जन्म का अर्थ है — मृत्यु के बाद जीवात्मा अपने कर्मों के अनुसार नया शरीर धारण करती है। गीता में श्रीकृष्ण ने इसे स्वीकार किया है। कर्म-बंधन मिटने पर ही यह चक्र रुकता है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

आत्मा और परमात्मा में क्या अंतर है?

आत्मा हर जीव का अमर चेतन तत्व है; जीवात्मा माया-बद्ध आत्मा है; परमात्मा सर्वव्यापी ब्रह्म है। अद्वैत वेदांत के अनुसार आत्मा और परमात्मा मूलतः एक ही हैं।

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सनातन सिद्धांत

आत्मा क्या है?

आत्मा वह शाश्वत चेतन तत्व है जो प्रत्येक जीव में विद्यमान है। गीता (2/20) के अनुसार यह न जन्म लेती है, न मरती है, न शस्त्र से कटती है, न अग्नि से जलती है। यह नित्य, शाश्वत और अविनाशी है।

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आत्मा सिद्धांत

पशु पक्षियों में भी आत्मा होती है क्या?

हाँ, गीता (5.18): ज्ञानी ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते में समान आत्मा देखते हैं। ईशोपनिषद: सम्पूर्ण जगत में ईश्वर व्याप्त। सभी जीवों में एक समान आत्मा, शरीर भिन्न। कर्मानुसार 84 लाख योनियों में जन्म। यही अहिंसा का मूल आधार।

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दर्शन

जीवात्मा और परमात्मा में क्या अंतर है?

मुण्डक उपनिषद (3.1.1): दो पक्षी — जीवात्मा (फल खाता) और परमात्मा (साक्षी)। जीवात्मा = अणु, कर्मबद्ध, माया प्रभावित। परमात्मा = सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, माया स्वामी। गीता (15.7): जीव ईश्वर का अंश। अद्वैत: दोनों एक, द्वैत: सदा भिन्न।

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