ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

दान क्या है?(12)

दान का अर्थदान क्या है?दान का महत्व
सरल उत्तर

अन्न दान सर्वश्रेष्ठ। अन्य: वस्त्र, धन, गो, पूजा सामग्री, विद्या दान। नियम: दाहिने हाथ से, श्रद्धापूर्वक, गुप्त रूप से, यथाशक्ति, सत्पात्र को। सोमवार/प्रदोष/शिवरात्रि विशेष फलदायी। उद्देश्य: सेवा भावना, बदले की अपेक्षा नहीं।

स्रोत प्रश्न: शिव मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है? →
शिव पूजा

शिव मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?

अन्न दान सर्वश्रेष्ठ। अन्य: वस्त्र, धन, गो, पूजा सामग्री, विद्या दान। नियम: दाहिने हाथ से, श्रद्धापूर्वक, गुप्त रूप से, यथाशक्ति, सत्पात्र को। सोमवार/प्रदोष/शिवरात्रि विशेष फलदायी। उद्देश्य: सेवा भावना, बदले की अपेक्षा नहीं।

#दान#मंदिर#शास्त्रीय विधान
भक्ति एवं आध्यात्म

दान कर रहे हैं पर दरिद्रता दूर नहीं हो रही — कारण क्या है?

दान का फल तब अधिक होता है जब — बिना दिखावे के सही पात्र को, सात्विक भाव से दिया जाए (गीता 17.20)। प्रारब्ध कर्म का ऋण चुकाने में समय लगता है। दान के साथ परिश्रम और अनुशासन भी जरूरी है।

#दान#दरिद्रता#कर्म
दान और साधुधर्म

दान का सही लक्षण क्या है?

न्यायपूर्वक अर्जित प्रिय द्रव्य को गुणी पात्र को देना दान का लक्षण है।

#दान#न्यायपूर्वक धन#गुणी पात्र
श्रीमद्भागवत

तपस्या और दान का असली फल क्या है?

तपस्या और दान का असली फल श्रीकृष्ण के गुण और लीला का वर्णन करना बताया गया है।

#तपस्या#दान#कृष्ण गुण
लोक

आधी रोटी बांटने का धार्मिक महत्व क्या है?

कम में भी बाँटना करुणा और धर्म का बड़ा रूप है।

#दान#भोजन#अतिथि
उद्यापन और दान

शनिवार को क्या दान करना चाहिए और 'छाया दान' क्या है?

शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, लोहा, काला कपड़ा और उड़द की दाल दान करनी चाहिए। कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करने को 'छाया दान' कहते हैं, जिससे रोग दूर होते हैं।

#दान#छाया दान#काले तिल
जीवन एवं मृत्यु

बभ्रुवाहन कौन थे?

बभ्रुवाहन त्रेता युग के महोदय नगर के राजा थे — यज्ञानुष्ठानपरायण, दानियों में श्रेष्ठ, ब्राह्मणभक्त और धर्मपरायण। गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में इनकी कथा दान-महिमा और प्रेत-मुक्ति के उपदेश के रूप में है।

#बभ्रुवाहन#गरुड़ पुराण#त्रेता युग
जीवन एवं मृत्यु

दान के बिना क्या होता है?

दान के बिना — यममार्ग पर भूख-प्यास की यातना, वैतरणी में नाक में कांटा फंसाकर खींचा जाना, प्रेत-दशा, नरक में अतिरिक्त यातना और अगले जन्म में अभाव। यमदूत 'अन्न-जल दान न करने' का उलाहना देते हैं।

#दान#अभाव#यातना
जीवन एवं मृत्यु

दान क्या है?

दान = श्रेष्ठ पात्र को, उचित समय पर, बिना स्वार्थ के देना। गरुड़ पुराण में 'वितरण' (वि+तरण) कहा गया है — देने से ही वैतरणी पार होती है। भूलोक, भुवर्लोक और देवलोक सभी दान से तृप्त होते हैं।

#दान#परिभाषा#गरुड़ पुराण
त्योहार पूजा

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शास्त्रीय आधार क्या है?

सोना अक्षय: 'अक्षय' तिथि=अक्षय फल, सोना=अविनाशी (शाश्वत समृद्धि), लक्ष्मी प्रतीक, अक्षय पात्र कथा। शास्त्रीय सत्य: मूलतः 'अक्षय दान' = सर्वोत्तम (दान>खरीदारी)। अबूझ मुहूर्त=सदा शुभ।

#अक्षय तृतीया#सोना#अक्षय
श्राद्ध-पितृ कर्म

पितृपक्ष में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?

पितृपक्ष दान: अन्न (सर्वश्रेष्ठ), वस्त्र, शय्या (बिस्तर), छाता, जूते, गोदान (सर्वोच्च), तिल, जलपूर्ण घड़ा। विधि: स्नान→दक्षिण मुख→संकल्प→दान+दक्षिणा। योग्य पात्र। पितृपक्ष दान = अनेकगुना फल।

#पितृपक्ष#दान#श्राद्ध
मंदिर नियम

मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?

गीता: सही स्थान-काल-पात्र + बिना प्रत्युपकार = सात्विक दान (श्रेष्ठ)। प्रकार: अन्न (सर्वोत्तम), धन (हुंडी), वस्त्र, गो-दान, तेल/घी। नियम: श्रद्धा, गोपनीयता, दाहिने हाथ से, सामर्थ्यानुसार। शुभ समय: एकादशी, संक्रांति, ग्रहण। दबाव/भय से दान = वर्जित।

#दान#मंदिर दान#दान विधि
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

दान टैग
दान पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी दान सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।