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क्या है

पुनर्जन्म क्या है?(12)

पुनर्जन्म का अर्थपुनर्जन्म क्या है?पुनर्जन्म का महत्व
सरल उत्तर

पुनर्जन्म = कर्म-बंधन के कारण आत्मा का नए शरीर में प्रवेश। गीता 2.22 — पुराना वस्त्र त्याग, नया वस्त्र — आत्मा का रूपक। आत्मा अजन्मा, अमर (कठोपनिषद)। कर्म अनुसार 84 लाख योनियाँ। गरुड़ पुराण में मृत्युपश्चात् यात्रा का वर्णन। मोक्ष = पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति।

स्रोत प्रश्न: पुनर्जन्म क्या है? →
सनातन सिद्धांत

पुनर्जन्म क्या है?

पुनर्जन्म = कर्म-बंधन के कारण आत्मा का नए शरीर में प्रवेश। गीता 2.22 — पुराना वस्त्र त्याग, नया वस्त्र — आत्मा का रूपक। आत्मा अजन्मा, अमर (कठोपनिषद)। कर्म अनुसार 84 लाख योनियाँ। गरुड़ पुराण में मृत्युपश्चात् यात्रा का वर्णन। मोक्ष = पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति।

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कर्म सिद्धांत

84 लाख योनियां क्या हैं और मनुष्य कैसे बनता है?

पद्म पुराण के अनुसार: जलचर 9L + पेड़-पौधे 20L + कृमि 11L + पक्षी 10L + पशु 30L + मानव 4L = 84 लाख। शुभ कर्मों से मनुष्य जन्म मिलता है। मनुष्य में विवेक और मोक्ष की क्षमता — 'बड़े भाग मानुष तन पावा' (रामचरितमानस)।

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श्रीमद्भागवत

सूक्ष्म शरीर और जीव का संबंध क्या है?

स्थूल रूप से परे सूक्ष्म शरीर बताया गया है; आत्मा का उसमें आरोप या प्रवेश होने से वही जीव कहलाता है और उसका पुनर्जन्म होता है।

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लोक

वितल लोक में पुण्य खत्म होने पर क्या होता है?

वितल लोक में पुण्य खत्म होने पर आत्मा फिर पृथ्वी लोक पर जन्म लेती है।

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जीवन एवं मृत्यु

पशु-पक्षियों की मृत्यु के बाद क्या होता है?

पशु-पक्षी भोग योनि में होते हैं। मृत्यु के बाद उनकी जीवात्मा अपने संचित कर्मों के अनुसार अगली योनि धारण करती है और क्रमशः उच्च योनियों की ओर बढ़ती है जब तक मनुष्य जन्म न मिले।

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जीवन एवं मृत्यु

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर वह अदृश्य आवरण है जो मन, बुद्धि, अहंकार, इंद्रियों और प्राणों से बना होता है। यही एक जन्म से दूसरे जन्म में जाता है और इसमें सभी कर्मसंस्कार संचित रहते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

जीवन और मृत्यु का सनातन सिद्धांत क्या है?

सनातन सिद्धांत के अनुसार जन्म और मृत्यु एक अखंड चक्र है। आत्मा अजर-अमर है, केवल शरीर बदलता है। कर्मों के अनुसार अगली योनि मिलती है और यह चक्र मोक्ष प्राप्ति तक चलता रहता है।

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पाप एवं दंड

महापापी की पहचान क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार महापापी की पहचान उसके शरीर के चिह्नों से होती है — ब्रह्महत्यारा क्षय रोगी, गोघाती कुबड़ा, मद्यपान करने वाले के दाँत काले, गुरु-अपमानकर्ता मिरगी का रोगी और परस्त्रीगामी नपुंसक होता है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

पुनर्जन्म का सिद्धांत क्या है?

पुनर्जन्म का अर्थ है — मृत्यु के बाद जीवात्मा अपने कर्मों के अनुसार नया शरीर धारण करती है। गीता में श्रीकृष्ण ने इसे स्वीकार किया है। कर्म-बंधन मिटने पर ही यह चक्र रुकता है।

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आत्मा और मोक्ष

पुनर्जन्म का प्रमाण क्या है शास्त्रों में

शास्त्रीय प्रमाण: गीता 2.12, 2.22, 4.5 — कृष्ण ने स्पष्ट कहा कि बहुत जन्म बीत चुके। कठोपनिषद — आत्मा अमर। बृहदारण्यक — कर्मानुसार नया शरीर। योगसूत्र 2.12 — कर्माशय भावी जन्म निर्धारित करता है। भागवत में भरत मुनि के तीन जन्म प्रसिद्ध उदाहरण।

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शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में कर्म का सिद्धांत क्या है?

बृहदारण्यक (4/4/5) — 'जैसा कर्म, जैसा आचरण — वैसा ही बनता है।' छान्दोग्य (5/10/7) में देवयान और पितृयान — दो कर्म-मार्ग बताए गए हैं। ईशावास्योपनिषद (1-2) में निर्लेप कर्म का संदेश है। ब्रह्मज्ञान से सभी कर्म-बंधन नष्ट होते हैं।

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हिंदू धर्म दर्शन

हिंदू धर्म के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?

हिंदू धर्म के मुख्य सिद्धांत हैं — ब्रह्म की एकता, आत्मा की अमरता, कर्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत, मोक्ष को परम लक्ष्य मानना, चार पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष), चार आश्रम और अहिंसा का पालन। ऋग्वेद का 'एकं सत् विप्राः बहुधा वदन्ति' इसका मूल दर्शन है।

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और क्या है
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