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क्या है

मुक्ति क्या है?(16)

मुक्ति का अर्थमुक्ति क्या है?मुक्ति का महत्व
सरल उत्तर

मोक्ष = जन्म-मृत्यु के चक्र से पूर्ण मुक्ति। चार पुरुषार्थों में सर्वोच्च। चार मार्ग: कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग, राज योग। अद्वैत: आत्मा = ब्रह्म (शंकर)। विशिष्टाद्वैत: आत्मा ईश्वर में (रामानुज)। द्वैत: भक्ति से (मध्व)। मोक्ष = सच्चिदानंद की अवस्था।

स्रोत प्रश्न: मोक्ष क्या है? →
सनातन सिद्धांत

मोक्ष क्या है?

मोक्ष = जन्म-मृत्यु के चक्र से पूर्ण मुक्ति। चार पुरुषार्थों में सर्वोच्च। चार मार्ग: कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग, राज योग। अद्वैत: आत्मा = ब्रह्म (शंकर)। विशिष्टाद्वैत: आत्मा ईश्वर में (रामानुज)। द्वैत: भक्ति से (मध्व)। मोक्ष = सच्चिदानंद की अवस्था।

#मोक्ष#मुक्ति#जन्म-मृत्यु
माहेश्वर योग

माहेश्वर योग क्या है?

माहेश्वर योग शिवकृपा से प्राप्त होने वाला ज्ञानस्वरूप दिव्य योग है, जिसमें ज्ञान से योग और योग से मुक्ति बताई गई है।

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श्रीमद्भागवत

कृष्ण नाम लेने का महत्व क्या है?

जन्म-मृत्यु के घोर चक्र में पड़ा जीव भी यदि भगवान के मंगलमय नाम का उच्चारण कर ले, तो तुरंत मुक्त हो सकता है।

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श्रीमद्भागवत

आधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?

असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।

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श्रीमद्भागवत

सात दिन भागवत सुनने का फल क्या है?

सात दिन भागवत सुनने से धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ, और पुनः श्रवण से श्रोताओं को हरिधाम तथा गोलोक की प्राप्ति हुई।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह करने से क्या होता है?

सप्ताह-विधि से भागवत सुनने को मुक्ति देने वाला बताया गया है।

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परिचय और स्वरूप

माँ त्रिपुर भैरवी के भैरव कौन हैं?

माँ त्रिपुर भैरवी के भैरव = दक्षिणमूर्ति अथवा काल भैरव। दक्षिणमूर्ति = शिव का ज्ञान स्वरूप — भैरवी की विनाशकारी शक्ति भी अंततः ज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाती है।

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श्मशान और अमावस्या

अमावस्या की रात्रि का तांत्रिक महत्व क्या है?

अमावस्या की रात्रि ब्रह्मांडीय विलय और शून्य ऊर्जा से पूर्ण है — श्मशान + अमावस्या + शव + अहंकार नाश का संयोग एक शक्तिशाली ऊर्जा-चक्र बनाता है जो साधक को कई जन्मों की ऊँचाई पर ले जाता है।

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शिव-नाग संयुक्त सिद्धांत

कालसर्प शांति का वास्तविक अर्थ क्या है?

कालसर्प शांति का वास्तविक अर्थ है — अपने कर्म-बंधन (नाग-पाश) को पशुपति शिव को अर्पित करना ताकि वे उसे अपने आभूषण के रूप में धारण कर जीव को मुक्त कर दें।

#कालसर्प शांति#नाग पाश#पशुपति
पाशुपत अस्त्र साधना

पाशुपतास्त्र साधना का अंतिम निष्कर्ष क्या है?

यह साधना शिव की कृपा से मुक्ति, दिव्य शक्ति और आध्यात्मिक तेज पाने का मार्ग है।

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पाशुपत अस्त्र साधना

पाशुपत साधना का उच्चतम आध्यात्मिक फल क्या है?

इसका सर्वोच्च फल माया के बंधनों से मुक्ति और शिवत्व की प्राप्ति है।

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जीवन एवं मृत्यु

सपिंडीकरण से क्या होता है?

सपिंडीकरण से — प्रेत 'पितर' बन जाता है, प्रेत-शरीर से मुक्ति मिलती है, पारिवारिक पितर-श्रेणी में प्रवेश होता है और धर्मराज की सभा में आदरपूर्ण स्थान मिलता है।

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आत्मा और मोक्ष

मोक्ष क्या है और मोक्ष कैसे प्राप्त होता है

मोक्ष = जन्म-मृत्यु चक्र से स्थायी मुक्ति, सर्वदुःख निवृत्ति। अद्वैत में — आत्मा-ब्रह्म एकत्व का ज्ञान; विशिष्टाद्वैत में — वैकुंठ में शाश्वत सेवा; द्वैत में — भगवत्सान्निध्य। प्राप्ति: ज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म, ध्यान। गीता 8.15 — भगवान प्राप्ति = पुनर्जन्म नहीं।

#मोक्ष#मुक्ति#संसार चक्र
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ज्ञान का महत्व क्या है?

उपनिषदों में ज्ञान सर्वोच्च है। मुण्डकोपनिषद (1/1/3) परा विद्या (ब्रह्मज्ञान) को अपरा विद्या से श्रेष्ठ बताता है। (2/2/8) — ब्रह्मज्ञान से हृदय-ग्रंथि टूटती है, संशय दूर होते हैं। अनुभव-ज्ञान (अपरोक्षानुभूति) ही परम ज्ञान है।

#ज्ञान#उपनिषद#ब्रह्मज्ञान
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में मोक्ष का मार्ग क्या है?

उपनिषदों में मोक्ष का मार्ग है — श्रवण → मनन → निदिध्यासन (बृहदारण्यक 4/4/22), ओम् का ध्यान (माण्डूक्य), और ब्रह्मज्ञान से हृदय-ग्रंथि-भेदन (मुण्डकोपनिषद 2/2/8)। 'तत्त्वमसि' — तू ही ब्रह्म है — इस अनुभव का साक्षात्कार ही उपनिषदों का मोक्ष है।

#मोक्ष#उपनिषद#ज्ञान
गीता दर्शन

गीता में मोक्ष का मार्ग क्या है?

गीता में मोक्ष के मुख्य मार्ग हैं — ज्ञानयोग (4/37), भक्तियोग (12/7) और शरणागति (18/66)। अंतिम संदेश में श्रीकृष्ण कहते हैं — केवल मेरी शरण आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त करूँगा।

#मोक्ष#गीता#भक्तियोग
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