विस्तृत उत्तर
जिस प्रकार किसी परम पूज्य अतिथि के आगमन से पूर्व उनके निवास स्थान को स्वच्छ और सुसज्जित किया जाता है, उसी प्रकार भगवान के आवाहन से पूर्व शिवलिंग का विभिन्न संस्कारों द्वारा शोधन किया जाता है।
इस प्रक्रिया को 'अधिवास' कहते हैं, जिसका उद्देश्य मूर्ति को दिव्य ऊर्जा ग्रहण करने के योग्य बनाना है।
इसके अंतर्गत जलाधिवास, धान्याधिवास, पुष्पाधिवास और गंधाधिवास जैसी क्रियाएं की जाती हैं।





