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विस्तृत उत्तर
हम एक विशिष्ट देवी मंत्र का उपयोग करके, उस रत्न में सोई हुई दिव्य ऊर्जा को जागृत करते हैं, जो दैत्यराज बलि के यज्ञ के कारण उसमें पहले से ही सूक्ष्म रूप में विद्यमान है।
अब वह रत्न केवल ग्रह की रश्मियों को आकर्षित नहीं करता, बल्कि स्वयं अधिष्ठात्री देवी की कृपा का एक शक्तिशाली माध्यम बन जाता है।
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