विस्तृत उत्तर
ऋग्वेद के द्वितीय मंडल के ४१वें सूक्त के १६वें मंत्र (२.४१.१६) में महर्षि गृत्समद शौनक द्वारा की गई स्तुति सरस्वती के वैदिक महत्त्व को सर्वोत्कृष्ट और स्पष्ट रूप में परिभाषित करती है। यह मंत्र वैदिक साहित्य के सबसे प्रसिद्ध श्लोकों में से एक है:
अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वति।
अर्थात्: 'हे सरस्वती! आप माताओं में सर्वश्रेष्ठ (अम्बितमे), नदियों में सर्वश्रेष्ठ (नदीतमे) और देवियों में सर्वश्रेष्ठ (देवितमे) हैं।'
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