विस्तृत उत्तर
तैत्तिरीय ब्राह्मण के द्वितीय खंड में सरस्वती को 'वाग्मिता (eloquent speech) और मधुर संगीत की माता' घोषित किया गया है, जो उनके ज्ञान और कला की देवी बनने की प्रक्रिया का स्पष्ट आरंभ था।
यजुर्वेद में तो उन्हें भगवान इंद्र की माता (जिन्होंने इंद्र को चिकित्सा और हीलिंग के माध्यम से पुनर्जन्म दिया) और उनकी संगिनी दोनों रूपों में देखा गया है।





