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विस्तृत उत्तर
द्वापर युग में जब पांडवों ने खांडव वन का दहन किया, तब मय दानव ने अर्जुन की शरण ली। अर्जुन ने उन्हें प्राणदान दिया। इसी प्राणदान के प्रति कृतज्ञ होकर मय दानव ने युधिष्ठिर के लिए इन्द्रप्रस्थ में मय सभा का निर्माण किया। यह सभा जल और थल का भ्रम उत्पन्न करने वाली अद्भुत मायावी वास्तुकला का उदाहरण थी।
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