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विस्तृत उत्तर
अर्यमा देव पितरों के अधिपति माने जाते हैं। देव पितर ब्रह्मांडीय संतुलन और कर्मानुसार न्याय व्यवस्था में सहायक हैं, और अर्यमा उनके प्रमुख अधिष्ठाता हैं। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने “पितॄणामर्यमा चास्मि” कहकर पितरों में अर्यमा को अपनी विभूति बताया है। इससे अर्यमा का पितृ तंत्र में सर्वोच्च स्थान प्रमाणित होता है।
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