विस्तृत उत्तर
पौराणिक भूगोल और खगोल शास्त्र के अनुसार अतल लोक पृथ्वी के ठीक नीचे स्थित पहला भूमिगत लोक है। श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध के चौबीसवें अध्याय में श्री शुकदेव गोस्वामी राजा परीक्षित को ब्रह्मांड का विस्तार समझाते हुए स्पष्ट करते हैं कि भूमंडल (पृथ्वी) के नीचे से अधोलोकों की शुरुआत होती है। विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार पृथ्वी के नीचे एक के बाद एक सात पाताल स्थित हैं और इनमें से प्रत्येक लोक की ऊंचाई और विस्तार दस-दस हजार योजन है। इस प्रकार अतल लोक पृथ्वी से ठीक दस हजार योजन नीचे स्थित पहला विशाल भूमिगत लोक है। अतल लोक के ठीक नीचे दस हजार योजन की दूरी पर वितल लोक स्थित है और इस प्रकार यह पूरी संरचना ब्रह्मांड के निचले हिस्से में सत्तर हजार योजन तक फैली हुई है।
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