विस्तृत उत्तर
नैतिक मूल्य रटाने से नहीं, कहानियों के माध्यम से सहज रूप से आत्मसात होते हैं। भारतीय परंपरा में इसीलिए हजारों साल से कथाओं का महत्व रहा है।
सत्यता और ईमानदारी के लिए — राजा हरिश्चंद्र की कथा बच्चों को यह सिखाती है कि सत्य से विचलित न हों, चाहे कितनी भी कठिनाई आए। युधिष्ठिर की कथाएँ भी इसी मूल्य को समर्पित हैं।
भक्ति और विश्वास के लिए — प्रह्लाद की कथा, मीरा की कथा, और ध्रुव की कथा बच्चों को अटल श्रद्धा का पाठ पढ़ाती हैं।
सेवा और कर्तव्य के लिए — श्रवण कुमार की कथा (माता-पिता की सेवा), हनुमानजी की सेवाभावना (स्वामी-भक्ति और निःस्वार्थ सेवा) उत्तम उदाहरण हैं।
साहस और धर्म-रक्षा के लिए — राम और वन में जाने की कथा, अभिमन्यु की वीरता, और एकलव्य की निष्ठा बच्चों को संकल्पशक्ति सिखाते हैं।
विनम्रता और बुद्धि के लिए — पंचतंत्र की नीति-कथाएँ (जैसे 'तीन मछलियाँ', 'बंदर और मगरमच्छ') बच्चों को व्यावहारिक जीवन-दृष्टि देती हैं। विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतंत्र विशेष रूप से बच्चों के लिए ही लिखी गई थी।
इन कथाओं को बताने के बाद बच्चों से सरल प्रश्न पूछें — 'इस कहानी में हमें क्या सीखने को मिला?' — इससे उनकी समझ गहरी होती है।

