विस्तृत उत्तर
बच्चों के लिए प्रतिदिन की प्रार्थना सरल, संक्षिप्त और अर्थपूर्ण होनी चाहिए जिसे वे समझकर बोल सकें। कुछ प्रमुख प्रार्थनाएँ जो बचपन से सिखाई जा सकती हैं:
सुबह उठते ही हाथ देखते हुए यह श्लोक बोलें — 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥' — इसमें हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में गोविन्द का वास बताया गया है।
भोजन से पहले — 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥' (भगवद्गीता) — अथवा सरल रूप से 'हे अन्नपूर्णे माता, इस भोजन को स्वीकार करो, हमें बल-बुद्धि दो।'
सोने से पहले — 'करचरण कृतं वाक् कायजं कर्मजं वा, श्रवण नयनजं वा मानसं वाऽपराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व, जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥' — यह आदि शंकराचार्य की प्रार्थना है जिसमें दिनभर की भूलों की क्षमा माँगी जाती है।
स्कूल जाने से पहले — 'सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥' — यह माँ सरस्वती से विद्या का आशीर्वाद माँगने की सरल प्रार्थना है।
इनके साथ गायत्री मंत्र भी थोड़ा बड़े होने पर (7-8 वर्ष के बाद) धीरे-धीरे सिखाया जा सकता है।





