विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के चौबीसवें अध्याय में वर्णित है कि अतल लोक के शासक बल असुर ने अपने तपोबल और जादुई शक्तियों से छियानवे (96) प्रकार की मायाओं का सृजन किया है। भागवत का श्लोक कहता है — येन ह वा इह सृष्टाः षण्णवतिर्मायाः — अर्थात उसने छियानवे प्रकार की जादुई मायाओं की रचना की है। आज भी कुछ परम मायावी लोग पृथ्वी पर बल द्वारा रची गई उन मायाओं में से एक या दो को धारण करते हैं या उनका अभ्यास करते हैं। देवी भागवत पुराण भी पुष्टि करता है कि कोई भी अन्य मायावी बल की सभी छियानवे मायाओं को नहीं जान सकता क्योंकि वे अत्यंत जटिल और पूर्णतः दुस्साध्य हैं। इन्हीं मायाओं के प्रभाव से अतल लोक के निवासियों की समस्त भौतिक आवश्यकताएं स्वतः उत्पन्न हो जाती हैं।
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