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विस्तृत उत्तर
बाल्यावस्था की मृत्यु के नियम सूक्ष्म हैं। यदि बालक उपनयन के बाद या किशोर अवस्था में मृत्यु को प्राप्त हुआ हो, तो पूर्ण दशगात्र, सपिण्डीकरण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, तथा पितृ पक्ष में तर्पण पंचमी को होता है।
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