विस्तृत उत्तर
बीज मंत्र की शक्ति का विवेचन तंत्रालोक और कुलार्णव तंत्र में मिलता है:
1ध्वनि = देवता
tंत्रालोक (अभिनवगुप्त): 'शब्दब्रह्म' — ध्वनि स्वयं ब्रह्म है। बीज मंत्र की विशेष ध्वनि देवता के स्वरूप के समान है। जब बीज मंत्र उच्चारित होता है — देवता की ऊर्जा जागृत होती है।
2संघनित शक्ति
कुलार्णव तंत्र: बीज मंत्र में देवता की सम्पूर्ण शक्ति एक अक्षर में संघनित है — जैसे परमाणु में ब्रह्मांडीय ऊर्जा।
3विशेष वर्ण
संस्कृत वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर में विशेष कंपन (frequency) होती है। बीज मंत्र के अक्षर — विशेष चक्र या देवता की frequency से मेल खाते हैं।
4नाद ब्रह्म
तंत्र में 'नाद' को ब्रह्मांड की मूल ध्वनि माना जाता है। बीज मंत्र उस नाद के सबसे निकट हैं।
5कम = अधिक
तंत्र शास्त्र: 'एकाक्षरं परं ब्रह्म।' — एक अक्षर सर्वोच्च ब्रह्म है। संक्षिप्त होने से मन एकाग्र होता है — बड़े मंत्र में मन भटकता है।
6वैज्ञानिक दृष्टि
नाद शास्त्र के अनुसार — छोटे, विशेष ध्वनि संयोजन मस्तिष्क के विशेष भागों को सक्रिय करते हैं।





