विस्तृत उत्तर
भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया और उनके यज्ञ के अश्व को वाल्मीकि आश्रम के पास दो तेजस्वी बालकों लव और कुश ने पकड़ लिया। जब भरत, शत्रुघ्न और हनुमानजी के नेतृत्व में अयोध्या की शक्तिशाली सेना अश्व को छुड़ाने पहुँची तो उन दो बालकों के पराक्रम के सामने उन्हें भी विवश होना पड़ा। युद्ध के चरमोत्कर्ष पर जब अयोध्या की सेना उन पर भारी पड़ने लगी तब लव और कुश ने भौमास्त्र का आवाहन किया। यह उनके द्वारा चलाया गया अंतिम रक्षात्मक उपाय था।
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