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विस्तृत उत्तर
भगवान के विराट रूप में महातल का टखनों में स्थित होना गहरा दार्शनिक अर्थ रखता है। मानव शरीर में टखने पूरे शरीर का भार वहन करने और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण जोड़ होते हैं। इसी प्रकार महातल ब्रह्मांडीय संरचना का वह विशाल आधार है, जो अपने भीतर असीमित भौतिक शक्तियों, क्रोधी नागों, दैत्यों और भारी कर्म-बंधनों को समेटे हुए है। यह स्थान दिखाता है कि महातल भौतिक सृष्टि के मूल आधार के अत्यंत निकट है।
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