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विस्तृत उत्तर
भगवान के विराट रूप में वितल लोक का स्थान जांघों में बताया गया है, और इसका अर्थ यह है कि वितल लोक ब्रह्मांडीय शरीर का एक ऊर्जावान और भार वहन करने वाला आधार है। जांघें शरीर को गति और स्थिरता प्रदान करती हैं। उसी प्रकार वितल लोक ब्रह्मांड के अधोभाग को मायावी और भौतिक स्थिरता प्रदान करने वाला लोक है। यह भगवान के विराट स्वरूप के साथ ब्रह्मांड की अधोलोक संरचना का अभिन्न संबंध दिखाता है।
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