विस्तृत उत्तर
ब्रह्मांड पुराण के प्रक्रिया पाद में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और चौदह लोकों की संरचना का अत्यंत विस्तार से वर्णन है जहाँ अतल लोक को भौतिक सघनता और माया के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। इसका कारण स्पष्ट है — अतल लोक का शासक बल असुर 96 प्रकार की मायाओं का सर्जक है। यहाँ का संपूर्ण वातावरण माया से निर्मित और संचालित है। यहाँ की स्त्रियाँ माया से उत्पन्न हुई हैं। हाटक रस का प्रभाव माया है। यहाँ के सुख-ऐश्वर्य सब माया हैं। और सबसे महत्वपूर्ण — हाटक रस पीकर ईश्वरोऽहं सिद्धोऽहम कहना भी सबसे बड़ी माया है। इस प्रकार अतल लोक भौतिक माया का चरम प्रकटीकरण है जहाँ जीव पूर्णतः भ्रम में डूबा रहता है।
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