विस्तृत उत्तर
चतुर्थ पीढ़ी को पूर्ण पिण्ड इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि मुख्य पिण्डदान केवल उन तीन पीढ़ियों को दिया जाता है जिनका शरीर में पैतृक अंश सबसे अधिक है—पिता, पितामह और प्रपितामह। ८४-अंश सिद्धान्त के अनुसार चतुर्थ पीढ़ी से केवल ६ अंश मिलते हैं, जबकि पहली तीन पीढ़ियों से कुल ४६ अंश मिलते हैं। चतुर्थ पीढ़ी और उससे ऊपर के पितरों का अंश शरीर में अत्यंत क्षीण हो जाता है, इसलिए उन्हें पूर्ण पिण्ड न देकर केवल लेप या जल मात्र का भाग दिया जाता है। यही कारण है कि वे पिण्डभाज् नहीं, बल्कि लेपभाज् श्रेणी में आते हैं।
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