विस्तृत उत्तर
दक्षिणावर्ती शंख अत्यंत दुर्लभ और शुभ शंख है जिसका मुख दायीं ओर खुलता है (सामान्य शंख बाईं ओर खुलते हैं)। इसे लक्ष्मी शंख भी कहा जाता है।
शास्त्रीय आधार
*'दक्षिणावर्तशंखस्तु पुण्ययोगादवाप्यते, यद्गृहे तिष्ठति सोवै लक्ष्म्याभाजनं भवेत्'*
अर्थात् जिस घर में दक्षिणावर्ती शंख होता है, वह लक्ष्मी का भाजन (निवास) बन जाता है।
लाभ
- 1धन-समृद्धि — माँ लक्ष्मी का प्रतीक होने के कारण यह धन, सम्पत्ति और आर्थिक समृद्धि प्रदान करता है।
- 2दरिद्रता निवारण — दरिद्रता से मुक्ति और आर्थिक बाधाओं को दूर करता है।
- 3यश-कीर्ति वृद्धि — सामाजिक प्रतिष्ठा और यश बढ़ता है।
- 4शत्रु भय से मुक्ति — शत्रुओं के भय और विघ्नों से रक्षा करता है।
- 5स्वास्थ्य लाभ — गोरक्षा संहिता, विश्वामित्र संहिता और पुलस्त्य संहिता में इसे आयुवर्द्धक और रोगनाशक बताया गया है। इसमें रात भर रखा जल प्रातः पीने से पेट और नेत्र रोगों में लाभ होता है।
- 6वास्तु दोष निवारण — शंख में रात भर जल भरकर सुबह घर में छिड़कने से वास्तु दोष दूर होते हैं।
- 7सुख-शांति — घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांतिपूर्ण वातावरण बनता है।
स्थापना विधि
- ▸बुधवार या बृहस्पतिवार, शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
- ▸पंचामृत, दूध, गंगाजल से स्नान कराएँ।
- ▸चाँदी के आसन पर लाल कपड़े पर स्थापित करें।
- ▸खुला भाग आकाश की ओर और मुख अपनी ओर रखें।
- ▸अक्षत और रोली से भरें।
विशेष: यह शंख बजाया नहीं जाता (मुख बंद होता है), केवल पूजा की जाती है। तंत्र शास्त्र में वामावर्ती शंख की अपेक्षा दक्षिणावर्ती शंख को विशेष महत्व दिया गया है।





