विस्तृत उत्तर
देवताओं को हवि (भोजन) पहुँचाने का माध्यम अग्नि ही है। देव-यज्ञ का मूल उद्देश्य वैदिक देवताओं का पोषण करना है। मान्यता है कि यदि हम यज्ञ के माध्यम से देवताओं का पोषण नहीं करेंगे, तो ब्रह्मांडीय शक्तियां क्षीण हो जाएंगी और आसुरी (नकारात्मक) शक्तियां प्रबल हो जाएंगी, जिसका सीधा दुष्प्रभाव चराचर जगत् पर पड़ेगा।
महर्षि दयानन्द सरस्वती एवं अन्य वैदिक विद्वानों के अनुसार, अग्निहोत्र के माध्यम से वायु और वर्षा के जल की शुद्धि होती है, जिससे सम्पूर्ण संसार को आरोग्य, बुद्धि, बल और सुख प्राप्त होता है।
अतः पर्यावरण के शोधन तथा आत्मिक उत्थान के लिए नित्य देव-यज्ञ (हवन) को गृहस्थों का अनिवार्य धर्म माना गया है।





